एक नदिया है मजबूरी की,
उस पार हो तुम इस पार है हम,
अब पार उतरना है मुश्किल,
मुझे बेकल बेबस रहने दो,
तुम भूल गये क्या गिला करे,
तुम, तुम जैसे थे हम जैसे नहीं,
कुछ अश्क बहेंगे याद में बस,
अब दर्द का सावन रहने दो !!