- हमारे लिए उनके दिल में चाहत ना थी ,
किसी ख़ुशी में कोई दावत ना थी ,
हमने दिल उनके कदमों में रख दिया ,
पर उन्हें ज़मीन देखने की आदत ना थी। - कुछ कदम हम चले ,
कुछ कदम तुम चले ,
फर्क सिर्फ इतना रहा ,
हम चले तो फाँसलेकाम होते गए ,
और तुम चले तो फाँसले बढ़ते गए। - काश वो समझते इस दिल की तड़प को ,
तो हमें यूँ रुसवा ना किया जाता ,
बेरुखी भी उनकी मंज़ूर थी हमें ,
एक बार बस हमें समझ लिया होता।